पंक्ति में सामने खड़े कुछ लोग नंगे हो चुके हैं,
कुछ लोग पीछे की कतार में खड़े शर्मा रहे हैं।
चुल्लू भर भी पानी मयस्सर नहीं जिनको डूबने के लिये,
वो भी खड़े-खड़े समन्दर का पता बतला रहे हैं ।
Saturday, October 4, 2008
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1 comment:
अधिक रोना ठीक नही बच्चे
थोड़ा हँसा भी करो
यह सही है कि दुष्यन्त कुमार को लिखो
पर खुद को भी कुछ लिखा करो
क्योकि...................
यदि मेरी जानकारी ठीक है
तो सुना है कि तुम लिखते, बोलते, सोचते, करते , हँसते और रोते अच्छा हो................
अर्थात् सब कुछ अच्छा करते हो
इसलिये लिखा करो
ताकि विचारों को सँजोया जा सके
कुछ पंक्तियों में भावनाओं को पिरोया जा सके।
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