Friday, October 31, 2008

मिलन-विरह

मिलन स्वप्न है विरह जागरण,
मैं अंजान दिशा से आया,
प्रेम-दान पाकर हरषाया,
आज विरह की वेला में फिर
छा रहा प्राणों पर मोह आवरण,
मिलन स्वप्न है विरह जागरण॥
--- shivlochan

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