Wednesday, October 29, 2008

उजाला बंदी है

चंद मछेरों ने साज़िश कर सागर की संपदा चुरा ली,
कांटों ने माली से मिलकर फूलों की कुर्की करवा ली,
खुशियों की हड़ताल हुई है, सुख की तालाबंदी है.....
आने को आई आज़ादी, मगर उजाला बंदी है ॥

No comments: