Friday, October 31, 2008

आदमी

ज़नरल, तुम्हारा टैंक एक मजबूत वाहन है
वह मटियामेट कर डालता है जंगल को
और रौंद डालता है सैंकड़ों आदमियों को
लेकिन उसमें एक नुक्स है
उसे एक ड्राइवर चाहिये,

जनरल, तुम्हारा बमवर्षक मज़बूत है
वह तूफान से तेज उड़ता और ढ़ोता है
हाथी से भी अधिक
लेकिन उसमें एक नुक्स है
उसे एक मिस्त्री चाहिये,

ज़नरल, आदमी कितना उपयोगी है
वह उड़ सकता है और मार सकता है,
लेकिन उसमें एक नुक्स है
वह सोच सकता है !!!
--बर्सोल्त ब्रेख्त

मिलन-विरह

मिलन स्वप्न है विरह जागरण,
मैं अंजान दिशा से आया,
प्रेम-दान पाकर हरषाया,
आज विरह की वेला में फिर
छा रहा प्राणों पर मोह आवरण,
मिलन स्वप्न है विरह जागरण॥
--- shivlochan

Wednesday, October 29, 2008

उजाला बंदी है

चंद मछेरों ने साज़िश कर सागर की संपदा चुरा ली,
कांटों ने माली से मिलकर फूलों की कुर्की करवा ली,
खुशियों की हड़ताल हुई है, सुख की तालाबंदी है.....
आने को आई आज़ादी, मगर उजाला बंदी है ॥

आग़ जलनी चाहिये

हो चुकी है पीर पर्वत सी, पिघ़लनी चहिये,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चहिये।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चहिये।
हर गली, हर मोहल्ले, हर चौराहे पर..... ,
हाथ लहराती हुई हर लाश चलनी चाहिये।
आज यह दीवार पत्ते की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिये।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही...... ,

हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिये.........॥

---------- दुष्यन्त कुमार

Saturday, October 4, 2008

pankti ke log

पंक्ति में सामने खड़े कुछ लोग नंगे हो चुके हैं,
कुछ लोग पीछे की कतार में खड़े शर्मा रहे हैं।
चुल्लू भर भी पानी मयस्सर नहीं जिनको डूबने के लिये,
वो भी खड़े-खड़े समन्दर का पता बतला रहे हैं ।